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समाज का आईना है थिएटर : एनएसडी प्रमुख चित्तरंजन त्रिपाठी

New Delhi

थिएटर समाज और अपने समय का आईना होता है। यही वजह है कि लोग थिएटर और थिएटर कलाकारों से डरते हैं। यह बात नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी ने हाल ही में इंडियन वुमेंस प्रेस क्रॉप्स में आयोजित एक संवाद कार्यक्रम में कही।
इस कार्यक्रम में वरिष्ठ अभिनेत्री, नृत्यांगना और रेडियो कलाकार जयश्री अरोड़ा भी मौजूद थीं। बातचीत का केंद्र डिजिटल दौर में थिएटर की संभावनाएं, खासतौर पर ओटीटी प्लेटफॉर्म्स, महिलाओं की भागीदारी और जेंडर स्टीरियोटाइप जैसी चुनौतियां रहीं। चित्तरंजन त्रिपाठी ने कहा कि एनएसडी देशभर से आने वाले विद्यार्थियों को केवल अभिनय ही नहीं, बल्कि थिएटर से जुड़े हर पहलू — जैसे स्टेज मैनेजमेंट, प्रोडक्शन और प्रस्तुति की गहन ट्रेनिंग देता है। यही कारण है कि एनएसडी से निकले कलाकारों ने फिल्मों, टेलीविजन और अब ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर भी अपनी मजबूत पहचान बनाई है।
उन्होंने बताया कि आज के दौर में थिएटर और नाट्य प्रस्तुतियों के दर्शक तेजी से बढ़े हैं और कलाकारों के लिए नए अवसर खुले हैं। इसी दिशा में एनएसडी ने ‘नाट्यम’ नाम का एक ऐप शुरू किया है, जिस पर अब तक एनएसडी के करीब 12,000 नाटक अपलोड किए जा चुके हैं। इसके जरिए लोग घर बैठे थिएटर का आनंद ले सकेंगे। इसके अलावा ‘रंगाकाश’ नाम से एक रेडियो प्लेटफॉर्म भी शुरू किया गया है, जहां रेडियो नाटक और इस विधा से जुड़ी अन्य जानकारियां साझा की जाएंगी। त्रिपाठी ने कहा कि बड़ी संख्या में युवा थिएटर की ओर आकर्षित हो रहे हैं, फिर भी उन्होंने लोगों से अपील की कि वे थिएटर देखने आएं और टिकट खरीदकर मंचन का समर्थन करें। यही नहीं, उन्होंने बताया कि सीनियर्स के लिए भी यहां पर एक्टिंग वर्कशॉप चलाई जा रही हैं, ताकि वे अपने शौक को अंजाम दे सकें।
करीब चार दशकों से थिएटर, फिल्मों, रेडियो और टेलीविजन से जुड़ी जयश्री अरोड़ा ने भी अपने अनुभव साझा किए। हम लोग में ‘भगवंती’ के किरदार से घर-घर में पहचान बनाने वाली जयश्री ने कहा कि थिएटर समाज में घट रही वास्तविक घटनाओं को ही मंच पर उतारता है। नाटकों और फिल्मों के किरदार अक्सर हमें अपनी वास्तविक जिंदगी में भी दिखाई देते हैं। उन्होंने अभिनय को एक इबादत और तपस्या बताते हुए कहा कि एक सच्चा कलाकार पूरी जिंदगी इस कला को साधने में लगा देता है। जब कोई अभिनेता किसी किरदार को ईमानदारी से निभाता है, तो दर्शक उससे केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि प्रेरणा भी लेते हैं। यही प्रेरणा समाज में बदलाव का कारण बन सकती है और लोगों के नजरिए को बदल सकती है। जयश्री अरोड़ा ने कहा कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने छोटे बजट और गैर-व्यावसायिक लेकिन सार्थक सिनेमा को नई पहचान दी है। पहले ऐसी फिल्मों को सिनेमाघर नहीं मिलते थे, लेकिन अब वे सीधे दर्शकों तक पहुंच पा रही हैं। महिलाओं की चुनौतियों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में भी महिलाओं को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। हालांकि उनका मानना है कि हर चुनौती से पार पाने की शक्ति महिलाओं के भीतर ही होती है। उनके शब्दों में, महिला शक्ति का प्रतीक है, वह कभी बेचारी नहीं होती।

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