उत्तराखंड के हक-हकूक और अस्मिता की रक्षा के लिए स्थायी राजधानी गैरसैंण समिति द्वारा विगत 8 मार्च 2026 से जारी क्रमिक अनशन आज 21 जून को अपने नए चरण सुरु होने के मुकाम पर पहुंच गया

देहरादून, 21 जून 2026: उत्तराखंड के हक-हकूक और अस्मिता की रक्षा के लिए स्थायी राजधानी गैरसैंण समिति द्वारा विगत 8 मार्च 2026 से जारी क्रमिक अनशन आज 21 जून को अपने नए चरण सुरु होने के मुकाम पर पहुंच गया है, लेकिन यह आंदोलन का समापन नहीं बल्कि दमनकारी और गूंगी-बहरी सरकार के खिलाफ एक आर-पार के महा-आंदोलन का उग्र शंखनाद है। आज अनशन के अंतिम दिन तमाम क्रांतिकारी अनशनकारी एक साथ मोर्चे पर डटे रहे और यह साफ कर दिया कि भगत सिंह के सिद्धांतों पर चलने वाला यह कारवां न सत्ता की बेरुखी से झुकेगा और न थमेगा। पूर्व आईएएस श्री विनोद प्रसाद रतुड़ी के दृढ़ नेतृत्व में संचालित यह जन-आंदोलन अब ‘प्रण से प्राण तक’ लड़ने के संकल्प के साथ आगे बढ़ेगा। सरकार कान खोलकर सुन ले कि जनभावनाओं को कुचलने का अंजाम भुगतने के लिए वह तैयार रहे; आगामी 13 अगस्त को सरकार की संवेदनहीनता के विरोध में सभी आंदोलनकारी सामूहिक बाल मुंडवाकर अपना आक्रोश दर्ज करेंगे और ठीक 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर देहरादून से लेकर गैरसैंण तक एक अभूतपूर्व, विशाल पदयात्रा का आगाज होगा जो इस गूंगी सत्ता की चूलें हिलाकर रख देगी। हम न रुकने वाले हैं, न झुकने वाले हैं, हमारा यह स्वाभिमानी संघर्ष तब तक थमेगा नहीं जब तक गैरसैंण को उसका वास्तविक अधिकार नहीं मिल जाता।
आज इस ऐतिहासिक महा-संकल्प सभा और अनशन के समापन के मौके पर आंदोलन को गति देने के लिए मुख्य रूप से पूर्व आईएएस विनोद प्रसाद रतुड़ी, अनिल बहुगुणा, पार्थ रतुड़ी, सचिन थपलियाल, पूर्व आईएएस एस.एस. पंक्ति, ब्रिगेडियर सर्वेश डंगवाल, गोपाल दत्त कुमेडी, सत्य प्रकाश कोठियाल, रामेश्वर शर्मा, प्रकाश थपलियाल, दुर्गा प्रसाद थपलियाल, अवदेश शर्मा, मनमोहन शर्मा, विजय भारत कंडारी, कुलदीप अग्रवाल, सुशील सिंह कैंतुरा और अनुसूया रतुड़ी सहित क्षेत्र के जागरूक, स्वाभिमानी और क्रांतिकारी आंदोलनकारी उपस्थित रहे और सबने एक सुर में गैरसैंण के लिए अंतिम सांस तक लड़ने की कसम खाई।
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