CJP के Ashutosh Ranka और Saurav Das को देखकर क्यों कतराए DCP ? अल्टीमेटम के साथ थाने में दी अर्जी

नई दिल्ली। जंतर मंतर पर 10 अक्टूबर की भारी हिरासत और सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका सोमवार दोपहर नई दिल्ली के डीसीपी दफ्तर पहुंचे और पुलिस अधिकारियों से मुलाकात कर जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति के लिए लिखित अर्जी दी।
दोनों नेता कुछ देर तक नई दिल्ली थाने के अंदर डीसीपी दफ्तर में रहे। बाहर निकलकर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया कि उनकी अर्जी पर सुविधानुसार अनुमति दी जाए।
रांका ने कहा कि पिछली बार स्पेशल कमिश्नर या ज्वाइंट कमिश्नर रैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि सीजेपी को 10 अक्टूबर के प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि उन्होंने 7 अक्टूबर को आवेदन किया था, जबकि 10 दिन पहले आवेदन करना जरूरी है। इसी कारण इस बार उन्होंने एडवांस में लिखित अनुरोध दिया है।
“शांतिपूर्ण विरोध हमारा संवैधानिक अधिकार है। हम मोदी जी या अमित शाह जी के घर के बाहर विरोध नहीं कर रहे हैं। हम सरकार द्वारा आधिकारिक तौर पर निर्धारित विरोध स्थल जंतर-मंतर पर विरोध करना चाहते हैं। हमें अनुमति क्यों नहीं दी जा रही? हम लोकतंत्र में रह रहे हैं और हमें शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है,” रांका ने कहा।
उन्होंने कठोर अपराधियों के लिए बनी वैन के अंदर प्रदर्शनकारियों की पिटाई की भी कड़ी निंदा की और कहा कि कॉलेज की लड़कियों, महिला पत्रकार रोज़ी और 71 वर्षीय परंजॉय गुहा ठाकुरता जैसे पत्रकारों को जानवरों की तरह उठाकर बसों में भरना बर्बरता है।
सूत्रों के मुताबिक जब रांका और दास डीसीपी दफ्तर पहुंचे तो अधिकारी उनसे सीधे मिलने से कतराते दिखे। करीब 20 मिनट तक उन्हें इंतजार कराया गया, जिसके बाद एक एसीपी रैंक के अधिकारी ने उनका ज्ञापन लिया। पुलिस सूत्रों का कहना है कि मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, जहां जस्टिस जॉयमाल्या बागची और वी मोहना की बेंच ने सभी बैरिकेड हटाने, इंटरनेट और मेट्रो बहाल करने का आदेश दिया है और दिल्ली पुलिस कमिश्नर, गृह सचिव और डीएमआरसी को अवमानना नोटिस जारी किया है, साथ ही वकील नॉर्मा अल्वारेस की दलीलों के बाद एक अन्य अदालत ने हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की तुरंत रिहाई और मेडिकल जांच का आदेश देकर मामले को कल दोपहर 12 बजे तक टाल दिया है।
वहीं सीजेपी ने कहा है कि अगर 24 घंटे में अनुमति नहीं मिली तो वे फिर से जंतर-मंतर जाएंगे और “जहां पुलिस रोकेगी, वही हमारा जंतर-मंतर बन जाएगा”।
दिल्ली पुलिस ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि नई दिल्ली जिले में अभी भी बीएनएसएस की धारा 163 लागू है।




