वर्ष 2017 से स्वीकृत सड़क परियोजना अब भी लंबित – 325 ग्रामीणों के अधिकारों से खिलवाड़, स्थानीय अवरोधों एवं संदिग्ध गतिविधियों पर उठे गंभीर सवाल



वर्ष 2017 से स्वीकृत सड़क परियोजना अब भी लंबित – 325 ग्रामीणों के अधिकारों से खिलवाड़, स्थानीय अवरोधों एवं संदिग्ध गतिविधियों पर उठे गंभीर सवाल
चमोली/थराली (उत्तराखण्ड):
ग्राम आगर चिमनी (चबाड़कोट डांगड सहित) को हरमनी–करचुंडा–देवपुरी मार्ग से जोड़ने वाली सड़क परियोजना, जो वर्ष 2017 में स्वीकृत हो चुकी है, आज तक धरातल पर नहीं उतर पाई है। सभी तकनीकी प्रक्रियाएँ एवं संयुक्त सर्वे पूर्ण होने के बावजूद DPR निर्गमन में निरंतर देरी प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रही है।
यह परियोजना 325 से अधिक ग्रामीणों के जीवन, सुरक्षा एवं बच्चों की शिक्षा से जुड़ी है। क्षेत्र का एकमात्र विद्यालय, जहाँ देवुरी, आगर चिमनी, डांगटोली, सानेड़, सैम एवं ज्युड़्दा के बच्चे अध्ययन हेतु आते हैं, आज भी सड़क कनेक्टिविटी से वंचित है।
बार-बार उत्पन्न किए जा रहे अवरोध
स्थल निरीक्षण के दौरान यह देखा गया कि कुछ व्यक्तियों द्वारा बिना वैध आधार के लगातार परियोजना में बाधा उत्पन्न की जा रही है। प्रशासन द्वारा 7 दिवस की समय-सीमा में वैध आपत्तियाँ प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है, जिसके पश्चात निराधार आपत्तियों को निरस्त किया जाना प्रस्तावित है।
स्थानीय हित बनाम जनहित – एक बड़ा सवाल
स्थानीय स्तर पर यह भी देखा जा रहा है कि कुछ व्यक्तियों/तत्वों के व्यावसायिक हित इस सड़क परियोजना से प्रभावित हो सकते हैं। वर्तमान में सड़क कनेक्टिविटी के अभाव के कारण दूरस्थ गाँवों में आवश्यक निर्माण सामग्री एवं अन्य वस्तुएँ उच्च दरों पर उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे आम ग्रामीणों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि सड़क कनेक्टिविटी सुनिश्चित होती है, तो बाजार प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और उन्हें उचित दरों पर आवश्यक सामग्री उपलब्ध हो सकेगी। ऐसे में परियोजना में बाधा उत्पन्न करना जनहित के विपरीत प्रतीत होता है।
पर्यावरणीय चिंताएँ – जांच की आवश्यकता
क्षेत्र से यह भी गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही हैं कि आसपास के क्षेत्रों में अवैध/अनियंत्रित खनन जैसी गतिविधियों की आशंका है, जो हिमालयी पारिस्थितिकी के लिए अत्यंत संवेदनशील विषय है।
यह आवश्यक है कि संबंधित विभाग इस संबंध में निष्पक्ष जांच करें, ताकि “Save Himalaya” के उद्देश्य के अनुरूप पर्यावरणीय संतुलन एवं नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
प्रशासनिक भूमिका पर भी उठे सवाल
ग्रामीणों के बीच यह भावना उभर रही है कि कुछ स्तरों पर अपेक्षित सक्रियता एवं निष्पक्षता का अभाव है। यह आवश्यक है कि सभी अधिकारी तटस्थ एवं जनहित में कार्य करते हुए परियोजना को प्राथमिकता दें, ताकि किसी भी प्रकार की भ्रांति या अविश्वास की स्थिति उत्पन्न न हो।
प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री की परिकल्पना से जुड़ा मुद्दा
यह स्थिति केंद्र एवं राज्य सरकार की “अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी (Last Mile Connectivity)” की नीति के विपरीत है।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा दूरस्थ क्षेत्रों के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों के बावजूद, इस प्रकार की देरी अत्यंत चिंताजनक है।
प्रमुख मांगें
सड़क परियोजना हेतु DPR का तत्काल निर्गमन
परियोजना में हो रही देरी की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच
निराधार आपत्तियों को समयबद्ध तरीके से निरस्त किया जाए
संभावित अवैध गतिविधियों (जैसे खनन आदि) की जांच एवं आवश्यक कार्यवाही
परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र प्रारंभ किया जाए
वीडियो एवं साक्ष्य उपलब्ध
स्थल निरीक्षण एवं वास्तविक परिस्थितियों से संबंधित वीडियो साक्ष्य भी संलग्न किए जा रहे हैं, जिससे स्थिति की गंभीरता स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।
यह केवल एक सड़क नहीं, बल्कि न्याय, समान विकास और हिमालयी क्षेत्रों के संतुलित भविष्य की लड़ाई है।
:
देवेन एस खत्री
(ग्राम आगर चिमनी डांगर के समस्त ग्रामीणों की ओर से)






