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आरटीआई एक्ट की अति महत्वपूर्ण धारा में बदलाव करने वाली डाटा प्रोटक्शन एक्ट की धारा को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार से जवाब मांगा

New Delhi

व्यक्तिगत डेटा सुरक्षा कानून की धारा 44 (3) ने सूचना का अधिकार अधिनियम की अति महत्वपूर्ण धारा 8 (1) (जे) पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।

सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने इस मामले की महत्ता और संवेदनशीलता को देखते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।

​​डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP Act), 2023 की धारा 44(3) के माध्यम से RTI अधिनियम की धारा 8(1)(j) में संशोधन किया गया है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह संशोधन RTI कानून की आत्मा को कमजोर करता है और सरकारी जवाबदेही को कम करता है।

* विवाद का मुख्य कारण : धारा 8(1)(j) में क्या बदला ?
​RTI अधिनियम की मूल धारा 8(1)(j) में प्रावधान था कि व्यक्तिगत जानकारी तब दी जा सकती है यदि :
• ​वह व्यापक जनहित (Public Interest) से जुड़ी हो।
• ​वह जानकारी संसद या राज्य विधानसभा को देने से मना न की जा सके।

* ​नया बदलाव : DPDP एक्ट के लागू होने के बाद, अब सभी व्यक्तिगत जानकारी को RTI के दायरे से बाहर कर दिया गया है। अब “जनहित” के आधार पर जानकारी देने का विवेकाधिकार (Discretion) लगभग समाप्त हो गया है।

* इस बड़े कानूनी बदलाव को असंवैधानिक बताते हुए चुनौती देने वाली जनहित ​याचिका में इन बिंदुओं पर चिंता जताई गई है –
• ​जवाबदेही में कमी : सरकारी अधिकारियों की संपत्ति, शैक्षणिक योग्यता, अन्य प्रकार की पात्रता, खर्चों से जुड़ी जानकारी अब “व्यक्तिगत डेटा” के नाम पर छुपाई जा सकती है।
• ​RTI का कमजोर होना : याचिका के अनुसार, यह संशोधन RTI अधिनियम के उस उद्देश्य को विफल करता है, जो भ्रष्टाचार को रोकने और पारदर्शिता लाने के लिए बनाया गया था।
• ​संवैधानिक उल्लंघन :
यह बदलाव संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत नागरिकों के “जानने के मौलिक अधिकार” का उल्लंघन करता है।
​कोर्ट की वर्तमान स्थिति

* ​सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) से जवाब मांगा है।
अदालत यह जांच करेगी कि क्या डेटा सुरक्षा के नाम पर सूचना के अधिकार को इस हद तक सीमित किया जा सकता है।

* मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी.वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ इसकी सुनवाई कर रही है।

* सुप्रीम कोर्ट में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP), 2023 के खिलाफ जनहित याचिका मुख्य रूप से इन व्यक्तियों और संगठनों की ओर से दायर की गई है
​ (Petitioners) –
~ ​किशनभाई मगंजीभाई कनानी (Kishanbhai Maganjibhai Kanani) इस मामले के मुख्य याचिकाकर्ता हैं,
जो आरटीआई (RTI) कार्यकर्ता हैं।
~ ​अंजलि भारद्वाज (Anjali Bhardwaj) : प्रसिद्ध सूचना अधिकार कार्यकर्ता और ‘सतर्क नागरिक संगठन’ की संस्थापक।
~ ​निखिल डे (Nikhil Dey) : ‘मजदूर किसान शक्ति संगठन’ (MKSS) के सह-संस्थापक और आरटीआई आंदोलन के प्रमुख चेहरा।
~ ​नेशनल कैंपेन फॉर पीपल्स राइट टू इंफॉर्मेशन (NCPRI) : यह संस्था भी इस कानूनी चुनौती का हिस्सा है।

* याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया है कि आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(j) में किया गया संशोधन असंवैधानिक है। मूल कानून के अनुसार, सार्वजनिक हित (Public Interest) होने पर व्यक्तिगत जानकारी दी जा सकती थी, लेकिन नए बदलाव ने इसे पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है।
इससे भ्रष्टाचार के मामलों की जांच और सरकारी पारदर्शिता पर गहरा प्रभाव पड़ने की आशंका है।
​सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं को एक साथ जोड़ते हुए केंद्र सरकार को चार सप्ताह के भीतर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

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