Uttrakhand

यार अमेरिका की गुंडागर्दी कब तक चलेगी अपना घर बार छोड़, बेचारे ईरान के पीछे क्यों पड़ा हुआ है : SATIRE

BY JAGESHWAR JOSHI, CARTOONIST AND WRITER

मैं निराश और हताश था.. कुकिंग गैस खतम हो गई थी.. मेरे दिल के टुकड़े-२ हो गए थे.. कुछ आक्रोशित थे.. आपस में बाद विवाद कर रहे थे
“यार अमेरिका की गुंडागर्दी कब तक चलेगी अपना घर बार छोड़, बेचारे ईरान के पीछे क्यों पड़ा हुआ है उसका अपना समाज है, सभ्यता है.. वो तेरि तरह खुल के नहीं जीना चहाता..मुंह ढक कर जीना चाहता है , उसकी पर्सनल ..चॉइस हैं”
“दूसरा टुकड़ा खीज के बोला तो ईरान कौन सा पुण्य कर रहा है उसके घर में रोज कलह है खुद अपनी निरीह औलादों को सांस तक नहीं लेने दे रहा है आम जन के जज़्बात जिंदा ही दफन है और तो और धीरे-धीरे वह दुनिया के लिए खतरनाक बनता जा रहा है”
“हाँ वह शैतान है.. लेकिन उसके पास गैस है गैस से चूल्हे ही नहीं जलते हमारी सभ्यता और संस्कृति के जश्न भी होते हैं.”.
मैं द्वंद में ही था..अपने दिल के बिखरे टुकड़ों को किसी तरह सम्हाल ही रहा था.. बगल पड़ोस के घर का शोर मेरे कानों आ पड़ा.. मेरा ध्यान टूटा.. पड़ोसी और उसकी पत्नी का जोर-जोर से झगड़ा हो रहा था वैसे यह रोजमर्रा की सामान्य सी बात थी.. आज कल तो गैस की कमी से हर घर में कलह है पर यहाँ तो चीखना-चिल्लाना यहाँ तक कि मार पिटाई चल रही थी..मैं उत्तेजित हो इस युद्ध में कूद पद पड़ा वैसे मैं शांत किस्म का व्यक्ति हूं गैस थी नहीं करने को कुछ भी न था.. मूड खराब था.. टूटे दिल से सड़क पर उतर पड़ा.. चिल्ला कर डांट लागाई !
“ये क्या शोरगुल मचा रखा है तुमने..?अपनी पत्नी के साथ तमीज़ से नहीं रह सकते ?”
“बेटा कितनी तमीज लाऊं.. आ जा तू ही रख ले इसे..तब पता चलेगा तुझे!”
पत्नी को ताने मारते हुए बोला “अरे सुनती है तेरा यार आ रखा है”
मुझे लगा यह पत्नी की भरपूर इन्सल्ट है.. पत्नी भले ही झगड़ालू थी लेकिन बेहद पतिव्रता थी वह गुस्से से लाल आंखें और बाल झटक के जोर से चिल्लाई “ऐ मिस्टर यह हमारा घर का मामला है.”
“घर का मामला है तो घर तक ही रखो” मैं बोला
“तो तू बीच में अमेरिका बनकर क्यों आ रहा है”
ईरान की तरह कट्टर और जज्बाती जरूर थी लेकिन भारत की नारी थी पतिव्रता तो थी ही। चख-२ के बीच क्रोध में भीतर से बेलन उठाकर मुझे निशाना बनाते हुए जोर से फेंका.. मैं ऊंचे मूल्यों युक्त उसकी पतिव्रता पर नत मस्तक था मेरा सर श्राद्धा से कुछ ज्यादा ही झुक गया गलती से बेलन मुझ पर न लगकर उसके पति पर जा लगा और वह धराशाई हो गया बिना फर्स्ट ऐड के भगवान को प्यारा हो गया .. दुनिया में सबकुछ कर्म ही नहीं किस्मत भी होती है अब मैं जिंदा था.. फंस गया कई धाराओं में धरा गया उसका पति सच-मु च मर गया था। अब मैं जेल की सलाखों के अंदर हूं बाहर बदनामी के अखबार मुझे कलंकित किये थे अगले दिनकी खबर थी ‘पत्नी और उसके प्रेमी ने पति को ठिकाने लगाया’ सोशियल मीडिया कै बयान बहादुर मुझ पर थू-२ ही नहीं उल्टियाँ तक कर रहे थे.. वह पतिव्रता भी कलंकित थी फिर भी जैल से निकल कर बेल पर थी। अचानक एक पेशी में हम दोनों की मुलाकात हुई वह मुस्कराई, शायद उसके घाव भर चुके थे।। आज उसकी आँखों में आज चिंगारी नहीं करुणा थी, बोली मुझे खेद है मेरी जरा सी चूक से आप सजा याफ़्ता हैं.. हमारीअपनी गैस एजेंसी हैं..पति भी मेरा कूल और obedient था.. आप जानते ही हैं गैस के धंधे में आज कल कितनी मारा मारि थी इसी स्ट्रेस से तो हमारा झगड़ा हुआ था.. अब बदनाम हो ही गए हैं अमेरिका की तरह दुनिया से बेपरवाह हो के क्यों न घर बसा लें मेरे घर में गैस की कोई कमी नहीं है खूब पकवान पाएंगे..आप भी भले इंशान और नारीवादी हैं हमारि खूब पटेगी
“माफ़ करणा मुझे नफरत हो गई है इस दुनिया से! मैडम में जैल मैं ही भला हूं रोटियां पकी पकाई मिल ही रहीं हैं , यहाँ कोई गैस trouble नहीं है न ही स्ट्रेस !

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