पौड़ी जिले के जयहरीखाल ब्लॉक के कोलागाड़ गांव से एक और दुखद खबर सामने आई है जहाँ भालू के हमले से बचने के लिए दौड़ती एक महिला पहाड़ से गिर गई और उसकी मौके पर ही मौत हो गई,

पौड़ी जिले के जयहरीखाल ब्लॉक के कोलागाड़ गांव से एक और दुखद खबर सामने आई है जहाँ भालू के हमले से बचने के लिए दौड़ती एक महिला पहाड़ से गिर गई और उसकी मौके पर ही मौत हो गई, ग्रामीणों के अनुसार भालू अचानक झाड़ियों से निकला और महिला की ओर दौड़ा, महिला ने अपनी जान बचाने के लिए भागने की कोशिश की लेकिन फिसलन भरे पहाड़ी रास्ते पर संतुलन बिगड़ने से वह गहरी खाई में जा गिरी। यह घटना अकेली नहीं है, उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में भालू का आतंक अब एक स्थायी संकट बन गया है। वन विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच वर्षों में उत्तराखंड में भालुओं ने 16 लोगों की जान ली है और 438 लोगों को घायल किया है, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए हाल ही में मृतकों के परिजनों को मिलने वाले मुआवजे को 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख करने और घायलों का मुफ्त इलाज कराने के आदेश दिए हैं। अगर पिछले 25 वर्षों का रिकॉर्ड देखा जाए तो तस्वीर और भी भयावह है, राज्य में पिछले 25 वर्षों में 1,972 लोग भालू के हमलों में घायल हुए हैं और 68 लोगों की मौत हुई है, अकेले वर्ष 2022 में 57 लोग घायल हुए और 1 की मौत हुई, 2023 में 53 लोग घायल हुए, 2024 में 65 हमले हुए जिसमें 3 लोगों की मौत हुई और इस वर्ष नवंबर 2025 तक ही 71 हमलों में 7 लोगों की मौत और 69 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं, जिनमें से अधिकतर हमले चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी, उत्तरकाशी, पौड़ी और पिथौरागढ़ जिलों में हुए हैं। यह संकट सिर्फ भालू तक सीमित नहीं है, मिजोरम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर विशंभर प्रसाद सती के अध्ययन के अनुसार उत्तराखंड में वर्ष 2000 से 2025 के बीच जंगली जानवरों के हमलों में कुल 954 लोगों की मौत हुई है, जिसमें से 438 मौतें यानी लगभग 46 प्रतिशत मौतें सिर्फ पिछले छह वर्षों यानी 2020 से 2025 के बीच हुई हैं, इस दौरान 2,335 लोग घायल भी हुए हैं, वर्ष 2024 में 84 मौतें और 2025 में 68 मौतें दर्ज की गई हैं, भालू के अलावा तेंदुआ, बाघ, हाथी भी बड़ा खतरा हैं, अध्ययन के मुताबिक राज्य में भालुओं ने 70 लोगों की जान ली है और 2,013 को घायल किया है, जबकि पूरे देश की बात करें तो केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार 2020 से 2024 के बीच जंगली जानवरों के हमलों में 460 मौतें और 4,527 घायल होने के मामले दर्ज हुए हैं, 2019 से 2024 के बीच हाथियों के हमलों में पूरे देश में 2,833 लोगों की मौत हुई है, जिसमें 2023-24 में अकेले 629 मौतें हुईं, बाघों के हमलों में 2014 से 2024 के बीच 621 लोगों की मौत हुई है जिसमें 2022 में सबसे ज्यादा 110 मौतें हुईं, एनसीआरबी की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार देशभर में जंगली जानवरों के हमलों से 1,742 लोगों की मौत या घायल होने की घटनाएं हुईं जो 2022 के 1,510 से ज्यादा हैं। वन अधिकारियों का मानना है कि जंगलों में भोजन की कमी, सेब के बागों और बस्तियों के पास कूड़ा-कचरा और मानव बस्तियों का जंगल की ओर बढ़ना इस संघर्ष की मुख्य वजह है, भालू अब सर्दियों में भी हाइबरनेशन में नहीं जा रहे हैं और गांवों, स्कूलों और दुकानों तक पहुंच रहे हैं, कोलागाड़ की इस ताजा घटना ने एक बार फिर पहाड़ में मानव-वन्यजीव संघर्ष के इस गंभीर होते संकट को उजागर कर दिया है, भगवान पुण्य आत्मा को शांति दें।
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