गंगा एवं हिमालयी ग्लेशियरों के संरक्षण पर गंभीर मंथन उत्तराखंड भवन, नई दिल्ली में आयोजित हुआ महत्वपूर्ण कार्यक्रम

नई दिल्ली, उत्तराखंड भवन में “गंगा एवं हिमालयी ग्लेशियरों के संरक्षण” विषय पर एक महत्वपूर्ण विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रबुद्ध जनों, समाजसेवियों एवं विधि विशेषज्ञों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति श्री राजेश टंडन, उत्तर प्रदेश के पूर्व प्रमुख सचिव श्री आलोक सिन्हा, उत्तराखंड विधायक दल के वरिष्ठ नेता एवं विधायक श्री किशोर उपाध्याय, लोक जनशक्ति पार्टी के प्रवक्ता श्री ए. के. बाजपेयी, भारत सरकार के पूर्व सचिव श्री हरीश शर्मा तथा सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता श्री हिमांशु उपाध्याय ने सहभागिता कर अपने विचार व्यक्त किए।
वक्ताओं ने हिमालयी ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले 25 वर्षों में माँ गंगा के जल प्रवाह पर गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने कहा कि ग्लेशियरों का निरंतर क्षरण केवल पर्यावरणीय संकट नहीं, बल्कि यह करोड़ों लोगों की आस्था, जीवन और भविष्य से जुड़ा राष्ट्रीय विषय है।
वक्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि गंगा और हिमालय का संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। जन-जागरूकता, नीति निर्माण तथा ठोस पर्यावरणीय प्रयासों के माध्यम से ही इस संकट का समाधान संभव है।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि इस महत्वपूर्ण विषय पर व्यापक जनचेतना अभियान चलाया जाएगा तथा अगला कार्यक्रम 25 मई 2026 को देहरादून में आयोजित किया जाएगा, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
सभी उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने संकल्प लिया कि गंगा और हिमालय के संरक्षण हेतु निरंतर प्रयास किए जाएंगे, ताकि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित पर्यावरण और निर्मल गंगा का वरदान मिल सके।




