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पौड़ी गढ़वाल में आदमखोर तेंदुए का फिर हमला – ईडा गांव में महिला गंभीर घायल

पौड़ी गढ़वाल, 23 अक्टूबर:

एकेश्वर विकास खंड के ग्राम ईडा मल्ला की लीला देवी को बाघ ने घायल कर दिया है। उन्हें हंस जनरल अस्पताल सतपुली में भर्ती करवाया गया है।

पौड़ी गढ़वाल जिले में आदमखोर तेंदुए का आतंक फिर बढ़ गया है। एकेश्वर ब्लॉक के ईडा मल्ला गांव में एक महिला पर तेंदुए ने हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। ग्रामीणों के अनुसार महिला अपने रोजमर्रा के काम / चारा लेने गई थी तभी घात लगाए तेंदुए ने हमला कर दिया। परिजन और ग्रामीण तुरंत उन्हें सतपुली के पास हंस अस्पताल ले गए जहां उनका इलाज चल रहा है।

पौड़ी गढ़वाल मानव-वन्यजीव संघर्ष में सबसे ज्यादा प्रभावित जिला है। पिछले कई महीनों में कई लोग मारे गए हैं, खासकर चारा/घास लेने जंगल गई महिलाएं।

सिर्फ 13 दिन पहले ही 10 अक्टूबर को खंडाह गांव में 51 वर्षीय बीना देवी को तेंदुए ने सुबह 5-6 बजे के बीच घास काटते समय मार डाला था, जिसके बाद ग्रामीणों ने पौड़ी-श्रीनगर हाईवे जाम कर दिया था।

प्रसिद्ध शिकारी जॉय हुकिल, जो पौड़ी के पास ही रहते हैं और कॉन्ट्रैक्टर व होमस्टे चलाते हैं, अब तक सरकारी आदेश पर करीब पचास तेंदुओं को मार चुके हैं।

9 जून 2026 को कोट ब्लॉक के बाड़ी गांव में आदमखोर को मारने के साथ उन्होंने 50 आदमखोर तेंदुए/बाघ मारने का रिकॉर्ड बनाया। इससे पहले दिसंबर 2025 में उन्होंने पौड़ी के गजल्ड गांव में 45 वर्षीय राजेंद्र नौटियाल को मारने वाली 5 साल की मादा आदमखोर को भी मारा था। जॉय हुकिल ने यह काम 2007 में शुरू किया था जब बड़ीगढ़ क्षेत्र में एक तेंदुए ने 11 लोगों को मार डाला था।

उत्तराखंड बनने के बाद से मानव-वन्यजीव संघर्ष ग्रामीण सुरक्षा का सबसे बड़ा संकट बन गया है।

– सरकार द्वारा विधानसभा में दिया गया आंकड़ा: वर्ष 2000 से अब तक 1,296 लोगों की जान वन्यजीवों के हमले में गई है और 6,624 लोग घायल हुए हैं।
– वन विभाग रिकॉर्ड (दिसंबर 2025 तक): 2000 से 2025 के बीच 954 मौतें दर्ज हुईं। इनमें अकेले तेंदुए ने 548 लोगों को मारा और 2,127 को घायल किया। हाथी से 230, बाघ से 106 और भालू से 70 मौतें हुईं।
– ब्रिटिश इकोलॉजिकल सोसाइटी की स्टडी (2000-2019):कुल 2,046 हमलों में से 1,914 हमले तेंदुए के थे, औसतन हर साल 98 हमले, जिनमें 22.3% घातक थे।

2020 के बाद से मौतों में बेतहाशा वृद्धि हुई है।

– 2020 से 2025 के बीच कुल 438 मौतें और 2,335 घायल होने के मामले दर्ज हुए, जो 2000 के बाद की कुल मौतों का लगभग 46% है।
– सबसे ज्यादा मौतें 2024 में 84 और 2022 में 82 हुईं। घायलों की संख्या 2024 में 512 और 2025 में 488 रही।
– सिर्फ 2026 में (जनवरी से सितंबर तक): 55 लोगों की मौत हुई और 407 घायल हुए, जिनमें तेंदुए से 17 मौतें हुईं।

वन मंत्री सुबोध उनियाल ने मृतकों के परिवार को मुआवजा 6 लाख से बढ़ाकर 10 लाख करने और संघर्ष रोकने के लिए 131 करोड़ रुपये का प्रावधान करने की घोषणा की है। क्विक रिस्पांस टीम, पिंजरे, ट्रैंक्विलाइजर, बायो-फेंसिंग और गांवों के आसपास झाड़ियां साफ करने की बात कही जा रही है, लेकिन पौड़ी, अल्मोड़ा, रुद्रप्रयाग, टिहरी और पिथौरागढ़ में हालात जस के तस हैं।

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