Uttrakhand

चमोली त्रासदी: भालू से भागते हुए खाई में गिरी दो महिलाएं, मौत — SDC संस्थापक अनूप नौटियाल ने सरकार को घेरा

 

देहरादून / चमोली, 4 सितंबर 2026

उत्तराखंड के चमोली जिले में मानव-वन्यजीव संघर्ष की एक और दर्दनाक घटना में दो महिलाओं की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि जंगल के किनारे भालू को देखकर भागने के दौरान वे गहरी खाई में गिर गईं।

यह घटना ऐसे समय हुई है जब गढ़वाल की ऊंची पहाड़ियों में भालू के हमले तेजी से बढ़े हैं।

SDC फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष और पर्यावरण मामलों पर नज़र रखने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल ने इस पर गहरा दुख जताया है। 4 सितंबर को जारी बयान में उन्होंने कहा:

“मैं उनकी मौत की खबर से बेहद दुखी और चिंतित हूं और शोकाकुल परिवारों के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूं। मैं मांग करता हूं कि इन मौतों को महज अलग-थलग हादसा न माना जाए। वन विभाग को जिम्मेदारी लेनी होगी और उत्तराखंड में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को गंभीरता से रोकना होगा।”

उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष के सरकारी आंकड़े क्या कहते हैं?

1. कुल मौतें और घायल (2000 से अब तक):
– वन विभाग / विधानसभा में पेश आंकड़े: 2000 से 31 जनवरी 2026 तक 1,296 लोग मारे गए और 6,624 घायल। एक अन्य सरकारी आंकड़े के मुताबिक यह संख्या 1,325 मौतें तक पहुंच चुकी है।
– HNB यूनिवर्सिटी के अध्ययन (Prof. V P Sati) के अनुसार 2000-2025 के बीच 954 मौतें, जिनमें से 46% यानी 438 मौतें सिर्फ 2020-2025 के बीच हुईं। इसी अवधि में 2,335 लोग घायल।

2. किस जानवर से कितना खतरा:
– तेंदुआ (Leopard):सबसे घातक – 2000-2025 में 548 मौतें, 2,127 घायल। 2025 में 18 मौतें, 105 घायल। 2026 के पहले 6 महीने में 15 मौतें, 46 घायल।
– हाथी: 230 मौतें, 234 घायल
– बाघ (Tiger): 106 मौतें, 130 घायल। 2026 के पहले 6 महीने में 11 मौतें।
– भालू (Bear):* 2000-2025 में 70 मौतें, 2,013 घायल। पिछले 5 साल में 16 मौतें, 438 घायल। 2025 में अकेले 8 मौतें, 107 घायल – जो 25 साल में सबसे ज्यादा है। 2026 में अब तक भालू से 1 मौत की पुष्टि, पर 71 हमले दर्ज।
– अन्य: मगरमच्छ से 2026 में 3 मौतें, सांप के काटने से 260 मौतें (25 साल में)।

3. भालू का आतंक क्यों बढ़ा?

– चमोली, पौड़ी, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग सबसे ज्यादा प्रभावित। भालू 17 में से 38 वन प्रभागों में समस्या बना है।
– अनुमानित आबादी: भालू ∼3,200, तेंदुआ 2,276, हाथी 2,026, बाघ 560
– कारण: जलवायु परिवर्तन से हाइबरनेशन में देरी, बर्फ कम पड़ना, जंगल में फल-फूल (बांज, काफल) की कमी, कचरा प्रबंधन न होना, और अक्टूबर-दिसंबर में hyperphagia (हाइबरनेशन से पहले ज्यादा खाने की अवस्था)।

4. आदमखोर (Maneater) पर कार्रवाई – शिकारी और शूट ऑर्डर:*
– नियम: पहले बेहोश कर पकड़ने की कोशिश, असफल होने पर मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक शूट ऑर्डर देता है।
– 30 जुलाई 2026 को: वन विभाग ने 13 तेंदुए और 3 भालू को आदमखोर / आदतन हमलावर घोषित कर मारने का आदेश दिया।
– 1 जनवरी 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच: 109 खतरनाक जानवरों को पकड़ने का आदेश, 89 तेंदुए, 21 बाघ, 8 भालू निगरानी में। इसी अवधि में 4 आदमखोर तेंदुए पेशेवर शिकारियों (हंटर) द्वारा मारे गए।
– पौड़ी के थलीसैंण में पहली बार एक भालू को आदमखोर घोषित किया गया था, जो दुर्लभ माना जाता है।
– पिछले एक दशक में 327 लोग वन्यजीव हमलों में मारे गए हैं।

5. मौजूदा स्थिति और मुआवजा:
– सरकार ने मृतक परिवार को मुआवजा 6 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये किया है और घायलों का पूरा इलाज सरकारी खर्च पर करने का आदेश दिया है।
– 2024 में 84 मौतें (सबसे ज्यादा), 2025 में 68 मौतें, 2026 में जून तक ही 36 मौतें – 2026 का आंकड़ा फिर बढ़ने की आशंका।
– ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर: 20 साल में 63,000 से ज्यादा मवेशी तेंदुआ-बाघ-भालू द्वारा मारे गए। 2025 में 6,441 मवेशी मारे गए।

चमोली में इस मानसून अब तक 16 मौतें हुई हैं, जिनमें से 10 को आधिकारिक तौर पर मानव-वन्यजीव संघर्ष में दर्ज किया गया है, जिसे उत्तराखंड सरकार ने अब राज्य-विशिष्ट आपदा घोषित किया है।

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