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बड़े भाव और श्रद्धा के साथ मनाई गई सुपरस्टार” राजेश खन्ना उर्फ काका की 14वीं पुण्यतिथि

सुनील नेगी, नई दिल्ली

नई दिल्ली: भारतीय सिनेमा के पहले और असली “सुपरस्टार” राजेश खन्ना उर्फ काका की 14वीं पुण्यतिथि शनिवार को राष्ट्रीय राजधानी में बड़े भाव और श्रद्धा के साथ मनाई गई। राजेश खन्ना नई दिल्ली से सांसद भी रह चुके हैं।

हर साल की तरह इस बार भी चाणक्यपुरी स्थित डिप्लोमैटिक एन्क्लेव में जीसस एंड मैरी कॉलेज के पीछे “राजेश खन्ना द ट्रीट” परिसर में सैकड़ों प्रशंसक, अनुयायी और आम लोग जुटे। काका के चाहने वालों के लिए यह जगह अब उनकी यादों का केंद्र बन चुकी है।

कार्यक्रम की शुरुआत हवन से हुई, जिसमें दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।

इसके बाद विपिन ओबेरॉय और उनकी पत्नी के नेतृत्व में सैकड़ों निर्माण श्रमिकों, जे.जे. क्लस्टर और निम्न मध्यम वर्ग के लोगों में भोजन के पैकेट और कपड़े वितरित किए गए। यह सेवा पिछले कई वर्षों से लगातार की जा रही है। इस आयोजन का पूरा श्रेय विपिन ओबेरॉय को जाता है I

इस मौके पर प्रीति देव, संजय निर्वाण, बाली, अनुष्का सहित कई जाने-माने गायकों ने काका के सुपरडुपर हिट गीत गाकर माहौल को यादों से भर दिया। ये सभी गाने मूल रूप से सुरों के सरताज किशोर कुमार ने गाए थे और पर्दे पर राजेश खन्ना पर फिल्माए गए थे।  “ये जो मोहब्बत है”, “जिंदगी एक सफर है सुहाना”, “मेरे सपनों की रानी” जैसे गीतों पर लोग झूमते हुए काका को याद करते रहे।

हवन और वितरण में उत्तराखंड के पूर्व राज्य मंत्री धीरेन्द्र प्रताप, यूकेजीन्यूज के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार श्री उत्तराखंड पत्रकार फोरम के अध्यक्ष Sunil Negi, विपिन ओबेरॉय, उनके परिजन, करीबी दोस्त और शुभचिंतक शामिल हुए।

29 दिसंबर 1942 को जतिन खन्ना के रूप में जन्मे राजेश खन्ना ने 1969 में आराधना  से स्टारडम की ऐसी ऊंचाई छुई कि उन्हें “पहला सुपरस्टार” कहा जाने लगा। 1969 से 1975 के बीच उन्होंने लगातार 15 सोलो हिट फिल्में दीं — दो रास्ते, सफर, आनंद, कटी पतंग, हाथी मेरे साथी, अमर प्रेम, बावर्ची, अवतार,  यह रिकॉर्ड आज तक नहीं टूटा है। उन्होंने लगभग 225 फिल्मों में काम किया और ज्यादातर में वह अकेले हीरो थे।

उनका अंदाज, सिर झुकाकर बात करना, डायलॉग डिलीवरी और रोमांस का अंदाज पूरे देश में क्रेज बन गया था। लड़कियां खून से चिट्ठियां लिखती थीं, लड़के उनके जैसे बाल रखते थे। वह पहले अभिनेता थे जिन्होंने एक फिल्म के लिए 1 करोड़ रुपये फीस ली।

सिनेमा के अलावा वह 1992 से 1996 तक नई दिल्ली से कांग्रेस के सांसद भी रहे। राजनीति में भी उनकी लोकप्रियता का जलवा देखने को मिला।

अपने करियर में राजेश खन्ना को आनंद, अमर प्रेम_ और अवतार  के लिए 3 फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार मिले। उन्हें कुल 14 बार फिल्मफेयर के लिए नामांकित किया गया, जो उस समय किसी भी अभिनेता के लिए सबसे ज्यादा था। 2005 में उन्हें फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड भी मिला।

18 जुलाई 2012 को उनके निधन के बाद भारत सरकार ने 2013 में उन्हें  पद्मश्री से सम्मानित किया। उन्हें सीएनएन-आईबीएन लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड और कई बीएफजेए अवार्ड भी मिले।

आज 14 साल बाद भी काका के गाने शादियों में बजते हैं, उनके डायलॉग बोले जाते हैं और उनकी फिल्में उसी लगन से देखी जाती हैं। चाणक्यपुरी में जब शाम को “पुष्पा आई हेट टीयर्स” और  “ना ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे”  गूंजा तो एक बात साफ हो गई , शरीर चला गया, लेकिन राजेश खन्ना का स्टारडम आज भी उतना ही चमकदार है।

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