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भारत में जल संकट का समाधान बनेगी जापान की झोकासो तकनीक, डाइकी एक्सिस इंडिया के MD रियो वाजा ने बताई बड़ी पहल

भारत में जल संकट का समाधान बनेगी जापान की झोकासो तकनीक, डाइकी एक्सिस इंडिया के MD रियो वाजा ने बताई बड़ी पहल

पत्रकार सुनील नेगी से विशेष बातचीत में बोले रियो वाजा विकेन्द्रीकृत अपशिष्ट जल उपचार से स्वच्छ भारत, जल संरक्षण और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को मिलेगी नई गति

नई दिल्ली। भारत में बढ़ते जल संकट, प्रदूषित नदियों और अपशिष्ट जल प्रबंधन की चुनौती के बीच जापान की अत्याधुनिक झोकासो (Johkasou) तकनीक एक प्रभावी समाधान के रूप में सामने आ रही है। डाइकी एक्सिस इंडिया के प्रबंध निदेशक (MD) रियो वाजा ने कहा कि विकेन्द्रीकृत अपशिष्ट जल उपचार के लिए झोकासो तकनीक भारत की वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप सबसे उपयोगी प्रणालियों में से एक है।
पत्रकार सुनील नेगी से हुई विशेष बातचीत में रियो वाजा ने बताया कि झोकासो एक कॉम्पैक्ट, ऊर्जा-कुशल और ऑन-साइट सीवेज उपचार प्रणाली है, जो बिना बड़े सीवर नेटवर्क के घरों, अपार्टमेंट, स्कूलों और छोटे समुदायों में ही अपशिष्ट जल का उपचार कर उसे पुनः उपयोग योग्य बनाती है। उन्होंने कहा कि यह तकनीक ग्रामीण क्षेत्रों, हाउसिंग सोसायटियों तथा उन इलाकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, जहां पारंपरिक सीवरेज व्यवस्था विकसित करना कठिन और महंगा है।
उन्होंने बताया कि जापान में वर्तमान में 86 लाख से अधिक झोकासो यूनिट सफलतापूर्वक संचालित हैं। उपचारित जल का उपयोग बागवानी, फ्लशिंग और अन्य गैर-पीने योग्य कार्यों में किया जाता है तथा इसकी गुणवत्ता जापान के कठोर पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप होती है।
रियो वाजा ने बताया कि डाइकी एक्सिस इंडिया अपनी CSR पहल DIAL (Daiki Axis India Action and Innovation for the Environment) के माध्यम से भारत में इस तकनीक के प्रसार के लिए कार्य कर रही है। हाल ही में आयोजित DIAL 2025-26 के राष्ट्रीय फाइनल में देशभर के विद्यार्थियों ने झोकासो आधारित जल पुनर्चक्रण मॉडल प्रस्तुत किए। कंपनी विद्यार्थियों को फंडिंग, मेंटरशिप और जापान अध्ययन भ्रमण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराकर इस तकनीक को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि भारत में बड़ी मात्रा में सीवेज आज भी बिना उपचार के नदियों में बहाया जाता है। ऐसे में झोकासो जैसी विकेन्द्रीकृत तकनीक स्थानीय स्तर पर जल उपचार और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देकर स्वच्छ भारत मिशन, जल संरक्षण और ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का भी मानना है कि जहां पारंपरिक सीवर नेटवर्क विकसित करना कठिन है, वहां झोकासो तकनीक भविष्य की टिकाऊ और व्यवहारिक जल प्रबंधन प्रणाली साबित हो सकती है।

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