उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली से पलायन और गर्भवती महिलाओं की मौतों का सिलसिला जारी

( picture from Apna Uttarakhand apni Janmbhoomi)
देहरादून, 04 सितंबर 2026
उत्तराखंड को अलग राज्य बने 26 वर्ष हो गए हैं, लेकिन स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की समस्याएं कम होने के बजाय और बढ़ गई हैं।
इन तीनों में सबसे अधिक बदहाल स्वास्थ्य क्षेत्र है, जिसके कारण राज्य के पहाड़ी इलाकों से लाखों लोगों का पलायन मैदानी क्षेत्रों, राज्य की राजधानी और महानगरों की ओर हो रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रोजगार, शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में पलायन की यह संख्या लगातार बढ़ रही है।
उत्तराखंड के लोग बेहतर सुविधाओं के लिए अन्य राज्यों में जा रहे हैं, वहीं पिछले एक दशक में मैदानी क्षेत्रों में अन्य राज्यों से आने वाली आबादी में लगभग 41 प्रतिशत और समग्र रूप से करीब 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
स्थानीय संगठनों का आरोप है कि बाहरी लोगों द्वारा बड़ी मात्रा में जमीनें खरीदकर काला धन सफेद किया जा रहा है और नदियों के किनारे बड़ी संख्या में रिसॉर्ट और होटल बनाए जा रहे हैं, जिससे राज्य का जनसांख्यिकीय संतुलन प्रभावित हो रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति इतनी खराब है कि गर्भवती महिलाओं की मौत के मामले भी बढ़ रहे हैं। कई गांवों में न तो स्वास्थ्य केंद्र या प्रसूति वार्ड हैं और न ही सड़क की सुविधा। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को कई किलोमीटर तक कंधों पर अस्थायी स्ट्रेचर में लेकर पैदल सड़क तक लाना पड़ता है, जिसके बाद अगर उपलब्ध हो तो एंबुलेंस से अस्पताल भेजा जाता है। रास्ते में ही कई महिलाओं की मृत्यु हो चुकी है, कुछ ने रास्ते में ही बच्चों को जन्म दिया है और अनेक महिलाएं अत्यधिक रक्तस्राव के कारण एनीमिक हो गई हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सैकड़ों गर्भवती महिलाओं की रास्ते में मौत हुई है, लेकिन सरकार ने स्थिति सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। एंबुलेंस अक्सर समय पर नहीं पहुंचती हैं और जो पहुंचती भी हैं उनमें डॉक्टर या परिचारक तथा जरूरी चिकित्सा उपकरण नहीं होते हैं।
आज थराली, कर्णप्रयाग में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण एक और महिला की मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अस्पताल से रेफर की गई गर्भवती महिला की 108 एंबुलेंस में अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही मौत हो गई। परिवार ने डॉक्टरों पर समय पर रेफर न करने और उपचार में लापरवाही का आरोप लगाया है। महिला के शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है और स्वास्थ्य विभाग से आधिकारिक जांच व प्रतिक्रिया का इंतजार है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि सरकार द्वारा शराब की बिक्री को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं, जो न केवल समाज और परिवारों के आर्थिक और सामाजिक ताने-बाने को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि उत्तराखंड में आपराधिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दे रहे हैं। उत्तराखंड सरकार शराब की भारी बिक्री से सालाना लगभग 4500 करोड़ रुपये कमाती है, लेकिन दुर्भाग्य से स्वास्थ्य के क्षेत्र में ऐसी कोई विश्वसनीय नीति या व्यवस्था नहीं बनाई गई है जिससे गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की मृत्यु और गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को आवश्यक चिकित्सा उपचार से वंचित होने से बचाया जा सके।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे।
*ॐ शांति ॐ*
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