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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को लगाई फटकार: सारी बैरिकेडिंग हटाओ, इंटरनेट बंद नहीं होगा, मेट्रो सामान्य चलाओ – छुट्टी के दिन विशेष सुनवाई में आदेश

SUNIL NEGI

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को छुट्टी के दिन विशेष सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के नाम पर लगाई गई सारी बैरिकेडिंग हटाई जाए, इंटरनेट बंद नहीं किया जा सकता और मेट्रो सेवाएं सामान्य रूप से चलाई जाएं।

जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की दो जजों की बेंच ने यह अंतरिम आदेश जारी किया। कोर्ट ने कहा –

“शहर में लोगों की सामान्य आवाजाही कानून के अनुसार बहाल की जाए। शांतिपूर्ण, निहत्थे लोगों की अवैध हिरासत नहीं होगी, खासकर उस क्षेत्र से बाहर जहां BNSS की धारा 163 लागू है। इंटरनेट सेवाएं कानून के अनुसार बिना बाधा के रहेंगी और मेट्रो-रेल सेवाएं सामान्य रूप से चलेंगी।”

क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने:

1. बैरिकेडिंग हटाओ: “जब तक बिल्कुल जरूरी न हो, सभी बैरिकेड हटाए जाएं। पब्लिक की फ्री मूवमेंट बहाल हो।”
2. इंटरनेट पर रोक नहीं: कोर्ट ने कहा इंटरनेट सस्पेंशन नहीं होगा। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि इंटरनेट सेवाएं बहाल कर दी गई हैं।
3. मेट्रो 45 नहीं, 303 स्टेशन चलाओ: दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर को 303 में से 45 मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री-एग्जिट बंद कर दी थी। कोर्ट ने कहा मेट्रो अपने सामान्य शेड्यूल पर चलेगी।
4. सुप्रीम कोर्ट के बाहर से धारा 163 हटाओ: कोर्ट ने नोटिस किया कि सुप्रीम कोर्ट कॉम्प्लेक्स के आसपास भी धारा 163 का नोटिस लगा दिया गया था। कोर्ट ने आदेश दिया कि इसे तुरंत हटाया जाए ताकि न्याय तक पहुंच बाधित न हो।
5. वकीलों, पत्रकारों को मत रोको: कोर्ट ने कहा वकीलों को उनके पेशेवर कर्तव्य निर्वहन से नहीं रोका जाएगा।

अवमानना नोटिस जारी

कोर्ट ने अपने 9 अक्टूबर के आदेश के कथित उल्लंघन पर दिल्ली पुलिस कमिश्नर, केंद्रीय गृह सचिव और DMRC को अवमानना नोटिस जारी किया है। उन्हें मंगलवार तक जवाब देना है। अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी।

याचिका वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी और कपिल सिब्बल ने दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि 10 अक्टूबर को हजारों लोगों की अवैध हिरासत, 22,000 जवानों की तैनाती, 4 किलोमीटर में इंटरनेट बंद और मेट्रो बंद कर शांतिपूर्ण विरोध के मौलिक अधिकार को दबाया गया।

कोर्ट ने टिप्पणी की, “विरोध का अधिकार है, इस पर कोई विवाद नहीं। लेकिन विरोध का तरीका पुलिस एक्ट के अनुसार होना चाहिए। आप यह दावा नहीं कर सकते कि आपका विरोध का अधिकार पुलिस एक्ट से ऊपर है।” कोर्ट ने यह भी कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना पुलिस को राज्य से अलग तर्क देने का स्वतंत्र अधिकार नहीं देता।

इसी सुनवाई के बाद CJP संस्थापक अभिजीत दीपके, सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने रिहा कर दिया। ये तीनों शनिवार सुबह पालम एयरपोर्ट पर प्लेन के अंदर से हिरासत में लिए गए थे।

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