संगीत, नृत्य, ग़ज़ल और विभिन्न कलाओं के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले दिग्गज कलाकारों का मुंबई में सम्मान




भजन सम्राट पद्मश्री अनूप जलोटा द्वारा प्रस्तुत १४वां वार्षिक ‘गौरव पुरस्कार २०२६’ का आयोजन आज मुंबई के इस्कॉन, जुहू में भव्यता के साथ संपन्न हुआ।
यह प्रतिष्ठित पुरस्कार संगीत, नृत्य, ग़ज़ल और विभिन्न कलाओं के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले दिग्गज कलाकारों को प्रदान किया गया। इस वर्ष का आयोजन विशेष रूप से अनुभवी कलाकार पुरूषोत्तम दास जलोटा की स्मृति में किया गया।
पुरस्कार विजेताओं को किया गया सम्मानित
समारोह में विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिभाशाली कलाकारों को पुरस्कृत किया गया:
🔹 भजन सम्राट पद्मश्री पुरूषोत्तमदास जलोटा संगीत सेवा पुरस्कार – प्रसिद्ध शास्त्रीय कलाकार पद्मभूषण श्री विश्व मोहन भट्ट को सम्मानित किया गया।
🔹 भजन महर्षि पंडित हरिओम शरण भक्ति संगीत पुरस्कार – सुप्रसिद्ध गायिका पद्मश्री डॉ. सोमा घोष को दिया गया।
🔹 पद्मश्री डॉ. रवींद्र जैन बहुमुखी प्रतिभा पुरस्कार – जानी-मानी लोक गायिका पद्मश्री श्रीमती मालिनी अवस्थी को प्रदान किया गया।
🔹 श्रीमती मेधा जलोटा श्रेष्ठतम मेधावी नृत्य कलाकार पुरस्कार – उभरते नृत्य कलाकार श्री गौतम मराठे को दिया गया।
समारोह की शुरुआत उभरती कथक नृत्यांगना सुश्री विधि ओझा द्वारा सरस्वती वंदना से हुई। सुश्री वैष्णवी शर्मा ने अर्जुन कृष्ण के संवाद का आलेखन किया।
समारोह में पद्मश्री अनूप जलोटा ने अपने शिष्यों संग भक्तिमय और संगीतमय प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके भजन और ग़ज़लों ने समां बांध दिया और श्रोता भावविभोर हो उठे।
इस प्रतिष्ठित भव्य कार्यक्रम में संगीत, कला, पत्रकारिता और समाजसेवा से जुड़ी कई नामचीन हस्तियां उपस्थित रहीं, अशोक खोसला, घनश्याम वासवानी, दुर्गा जसराज, अनुराधा पाल, संजय टंडन, संगीतकार बंधु पद्मश्री अली गनी आदि।
कार्यक्रम का संचालन अंकिता खत्री “नादान” ने किया, कार्यक्रम का सफल प्रबंधन “तथास्तु प्रोडक्शंस” द्वारा किया गया।
सहयोगियों की अहम भूमिका
१४ गौरव पुरस्कार २०२६ के आयोजन में हिंदुजा फाउंडेशन, वी आई पी, एफ ई आई कार्गो, ऐ डी एन फायर सेफ्टी, मोहता फाउंडेशन, साधना चैनल, टीवी एशिया, नूतन सवेरा, कटिंग चाय – मंच आपके विचारों का, ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भक्ति और संस्कृति का अनूठा संगम
१४ गौरव पुरस्कार २०२६ न केवल एक सम्मान समारोह था, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और भक्ति संगीत का एक अनुपम संगम भी था। इस कार्यक्रम ने एक बार फिर साबित किया कि भारतीय संगीत और कला का प्रभाव विश्व स्तर पर भी अनमोल और अमिट है।




