अयोध्या राम मंदिर दान विवाद और मध्य प्रदेश सीएम के भूमि सौदों पर उठे सवाल, भगवा पार्टी की छवि पर असर

लखनऊ/भोपाल, जून 2026।
एक ओर अयोध्या राम मंदिर में दान को लेकर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोपों ने जोर पकड़ा है, वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार पर लगभग 167 एकड़ जमीन और सैकड़ों प्लॉट खरीदने का नया विवाद मीडिया में सुर्खियों में है। दोनों मामलों को लेकर चल रही मीडिया कवरेज ने पारदर्शिता, ईमानदारी और अनुशासन का दावा करने वाली भगवा पार्टी और उसके शीर्ष नेताओं की प्रतिष्ठा पर सवाल खड़े किए हैं।
*राम मंदिर दान विवाद: SIT जांच, 200 किलो चांदी का सवाल*
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल ने अयोध्या राम मंदिर में दान की कथित चोरी की गहन जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट अतिरिक्त मुख्य सचिव को सौंप दी है। 13 जून 2026 को गठित तीन सदस्यीय SIT ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अन्य पदाधिकारियों से पूछताछ की। टीम ने सीसीटीवी फुटेज, ट्रस्ट के रिकॉर्ड, दानपात्र और कैश गिनती से जुड़े कर्मचारियों की भी जांच की।
विवाद तब और बढ़ गया जब वर्ल्ड सिंधी सर्विस संगम इंटरनेशनल के अध्यक्ष डॉ. राजू मनवानी ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि 26 जनवरी 2021 को सिंधी समुदाय ने 200 किलो चांदी की ईंटें, यानी एक-एक किलो की 200 ईंटें, चंपत राय को सौंपी थीं। मनवानी का कहना है कि तब इसकी कीमत करीब 1.5 से 2 करोड़ रुपये थी, जो आज 6 से 7 करोड़ रुपये है, लेकिन आज तक न तो रसीद मिली और न ही बताया गया कि चांदी का इस्तेमाल कहां हुआ। उन्होंने कहा कि दान देने वाले अब उनसे सवाल कर रहे हैं।
इसके अलावा अन्य आरोप भी सामने आए हैं। धर्मसेना के संस्थापक संतोष दुबे ने आरोप लगाया कि 1989 में राम मंदिर आंदोलन के दौरान देश-विदेश से लाई गई सोने, चांदी, हीरे और अष्टधातु से बनी 1,250 “राम शिला” अब गायब हैं। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि दैनिक चढ़ावे से करोड़ों रुपये गायब किए गए। शुरुआती आरोप 5 से 7.5 करोड़ रुपये के थे, जो अब 200 करोड़ रुपये से अधिक बताए जा रहे हैं। आप सांसद संजय सिंह ने ट्रस्ट अधिकारियों के खिलाफ FIR की मांग करते हुए शिकायत दर्ज कराई है।
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने गबन के आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि नियमित ऑडिट में कोई अनियमितता नहीं मिली। ट्रस्ट ने भी अफवाहों को रोकने के लिए निष्पक्ष जांच की मांग की है। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि जांच बिना किसी समझौते के होगी। अभी तक पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की है, लेकिन इलाहाबाद हाई कोर्ट में CBI और CAG ऑडिट की मांग वाली PIL भी दाखिल हुई है।
*मध्य प्रदेश: CM मोहन यादव के परिवार पर 168 एकड़ जमीन खरीदने के आरोप*
मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार पर उज्जैन में बड़े पैमाने पर जमीन खरीदने के आरोप लगे हैं। _इंडियन एक्सप्रेस_ की भूमि रिकॉर्ड पर आधारित रिपोर्ट का हवाला देते हुए कांग्रेस ने दावा किया कि 13 दिसंबर 2023 को सीएम बनने के बाद से दिसंबर 2025 तक, यादव के परिवार और उनकी रियल एस्टेट कंपनियों ने कम से कम 137 प्लॉट खरीदे, जो कुल 168 एकड़ हैं। इनकी कीमत करीब 45 करोड़ रुपये बताई गई है। रिपोर्ट में कहा गया कि इनमें से 111 एकड़ जमीन उन सड़क परियोजनाओं के पास है जिनकी घोषणा राज्य सरकार ने की थी, या उन क्षेत्रों में है जहां उज्जैन मास्टर प्लान 2035 के तहत कृषि भूमि को आवासीय/वाणिज्यिक में बदला जा सकता है।
कांग्रेस ने परिवार के कई सदस्यों के नाम लिए। रिपोर्ट के अनुसार: सीएम मोहन यादव के पास 17 एकड़, पत्नी सीमा यादव के पास 28 एकड़ और 10.6 एकड़ सीधे, बेटे वैभव के पास 17 एकड़, बहू शालिनी के पास 10 एकड़ जमीन है। इसके अलावा भाई नारायण 19 एकड़, चचेरे भाई गोविंद और परिवार 47 एकड़, चचेरे भाई नीलेश और पत्नी 108 एकड़, भाई नंदलाल 17 एकड़, बहन कलावती 17 एकड़, भतीजे अभय और साझेदार 17 एकड़, भाभी 16 एकड़ के मालिक बताए गए हैं। मोहन और सीमा यादव की सिद्धि विनायक डेवकॉन प्रा. लि. में 73% हिस्सेदारी है, जिसके पास 39.5 एकड़ जमीन थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि सीएम बनने से पहले परिवार के पास 108 प्लॉट यानी 179 एकड़ जमीन थी।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसे “लूट का इंजन” बताते हुए न्यायिक जांच और सीएम के इस्तीफे की मांग की। भाजपा ने आरोपों को निराधार बताया। पार्टी ने कहा कि यादव ने 2017 में सिद्धि विनायक के निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था और दूर के रिश्तेदारों की जमीन को सीएम से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। अधिकारियों का कहना है कि परिवार 2010 से रियल एस्टेट में है और जमीन का स्वामित्व मास्टर प्लान से पहले का है। सीएम कार्यालय ने _इंडियन एक्सप्रेस_ के सवालों का जवाब नहीं दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि दोनों मामलों की व्यापक मीडिया कवरेज से पार्टी की छवि प्रभावित हुई है। राम मंदिर मामले में भाजपा के कुछ नेताओं ने भी जांच की मांग की है। जून 2026 के अंत तक, SIT की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है और MP भूमि सौदों पर कोई सरकारी जांच घोषित नहीं हुई है। दोनों मामलों में अभी तक किसी अदालत का अंतिम फैसला नहीं आया है।
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