Cases and lawsuitsCrimeUttrakhand

मुझे उम्मीद कम दिखती है। शुरुआत से राजनीतिक प्रभाव नजर आता है। लेकिन हम चाहते हैं कि जांच स्वतंत्र हो। चाहे व्यक्ति कितना भी बड़ा क्यों न हो दोषी है तो सजा मिलनी चाहिए : Supreme Court senior advocate Collin Gonsalves

अंकिता को न्याय के लिए महापंचायत में धामी को हटाने की मांग! आरोप लगाया गया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुर्सी पर रहते अंकिता को न्याय मिलना मुश्किल है। प्रस्ताव में मांग हुई कि राष्ट्रपति अपने संवैधानिक अधिकारों का उपयोग करते हुए धामी को पद से हटाएं!
वक्ताओं ने CM धामी पर अंकिता के माता पिता को धोखा देने का आरोप लगाया! साथ ही सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में CBI जांच की मांग दोहराई गई!
अंकिता के हत्यारे पुलकित आर्य के परिवार को आयुर्वेद दवा सप्लाई का करोड़ों का ऑर्डर दिए जाने का विरोध किया गया! धामी और पुलकित के परिवार के बीच बड़ी कारोबारी डील का खुलासा हुआ 13 जनवरी 2026 को आयुर्वेदिक दवा सप्लाई का भी एक बड़ा टेंडर मैसर्स संस्कार मेडिकेयर को आवंटित किया गया। इस कंपनी का मालिक पुलकित आर्य का बड़ा भाई अंकित आर्य है और पिता विनोद आर्य हैं। कांग्रेस का आरोप है कि धामी ने जेल में बंद हत्यारों का नार्को टेस्ट न कराने की एवज में ये टेंडर जारी करवाया गया। ताकि हत्यारे VIP का नाम उजागर न करें! आरोप लगाया गया कि हत्यारों के परिवार को आर्थिक राहत दिलाने के लिए बैक डेट से टेंडर जारी किया गया! आज की चर्चा में उत्तराखंड महिला मंच की संयोजक कमला पंत, पूर्व सैनिकों ओर से ब्रिगेडियर सर्वेश्वर दत्त डंगवाल और सामाजिक कार्यकर्ता सुजाता पॉल ने भाग लिया!

इसee बीच वरिष्ठ पत्रकार उमाकांत लखेड़ा (पूर्व अध्यक्ष, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया) ने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंसाल्वेस से बातचीत कीI

निम्नलिखित है बातचीत

उमाकांत लखेड़ा:
अंकिता भंडारी केस में CBI जांच शुरू हो गई है। रिपोर्ट है कि CBI ने देहरादून और ऋषिकेश में कैंप कर लिया है और रिजॉर्ट के आसपास छानबीन भी शुरू कर दी है। लेकिन जनता के बीच संतोष नहीं दिख रहा। अंकिता के माता-पिता और करीब 40 संगठन सवाल उठा रहे हैं। 8 फरवरी को महापंचायत होने जा रही है। सबसे बड़ा विवाद 9 जनवरी को दर्ज नई FIR को लेकर है। इस नई FIR और CBI जांच पर आपका शुरुआती रिएक्शन क्या है?

कॉलिन गोंसाल्वेस:
मेरा शुरुआती रिएक्शन साफ है — मुझे इस नई FIR पर शक है। मैंने FIR देखी है। इसे दर्ज कराने वाले व्यक्ति डॉ. अनिल प्रकाश जोशी हैं, जिनका केस से कोई सीधा संबंध नहीं है। ऐसा व्यक्ति जो केस की हकीकत नहीं जानता, वो FIR कैसे लिखवा रहा है? इससे संदेह पैदा होता है।

उमाकांत लखेड़ा:
आप कह रहे हैं कि FIR दर्ज कराने वाला व्यक्ति केस से जुड़ा ही नहीं। क्या आपको लगता है कि यह सरकारी हस्तक्षेप का मामला हो सकता है?

कॉलिन गोंसाल्वेस:
मुझे लगता है कि सरकार का हाथ है। FIR में लिखा गया है कि मर्डर केस के आरोपी सजा पा चुके हैं। लेकिन एक मुख्य आरोपी बच गया है — एक कथित VIP कड़ी। पुरानी जांच को वहीं से आगे बढ़ना चाहिए था। नया केस बनाकर उसे अलग नहीं किया जा सकता।

उमाकांत लखेड़ा:
लेकिन सरकार कह रही है कि CBI जांच शुरू हो चुकी है। फिर जनता संतुष्ट क्यों नहीं है?

कॉलिन गोंसाल्वेस:
क्योंकि जांच स्वतंत्र नहीं दिख रही। अगर सरकार एक तरफ कहे CBI जांच हो और दूसरी तरफ उसी जांच को कंट्रोल करे — तो जनता भरोसा कैसे करेगी? हमें फ्री एंड फेयर इन्वेस्टिगेशन चाहिए।

उमाकांत लखेड़ा:
एक कानूनी सवाल — क्या एक ही अपराध में दो FIR चल सकती हैं?

कॉलिन गोंसाल्वेस:
नहीं। सुप्रीम कोर्ट साफ कह चुका है — एक अपराध में दो FIR नहीं हो सकतीं। पुराना केस बंद करके नया केस खड़ा करना गलत है। पुराना केस रीओपन करो और वहीं से जांच आगे बढ़ाओ।

उमाकांत लखेड़ा:
नई FIR जिन धाराओं में दर्ज है, वो हत्या से सीधे जुड़ी नहीं हैं। इस पर आपका क्या कहना है?

कॉलिन गोंसाल्वेस:
यही तो समस्या है। ये मर्डर केस है। सबूत मिटाने और आरोपी को बचाने की धाराएँ हैं, लेकिन हत्या की साजिश पर फोकस नहीं है। मुख्य मुद्दा मर्डर है — और उसमें VIP की भूमिका की जांच होनी चाहिए।

उमाकांत लखेड़ा:
रिजॉर्ट के उस हिस्से को बुलडोजर से गिरा दिया गया जहाँ अपराध हुआ था। क्या यह जांच को प्रभावित करता है?

कॉलिन गोंसाल्वेस:
बहुत बड़ा सवाल है। क्राइम सीन को नष्ट करना बेहद संदिग्ध है। किसने आदेश दिया? क्यों दिया? जब जांच चल रही थी तब सबूत क्यों मिटाए गए? CBI को इसकी अलग से जांच करनी चाहिए।

उमाकांत लखेड़ा:
मोबाइल फोन और CCTV फुटेज गायब होने के आरोप भी हैं।

कॉलिन गोंसाल्वेस:
मोफोन सबसे अहम एविडेंस है। होटल स्टाफ और आरोपियों के फोन गायब हैं। अंकिता का फोन भी नहीं मिला। CCTV घटना के समय बंद था — यह कोई मानने वाली बात नहीं है। ये जांच का केंद्रीय मुद्दा होना चाहिए।

उमाकांत लखेड़ा:
परिवार और संगठन मांग कर रहे हैं कि CBI जांच सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट मॉनिटर करे। क्या यह संभव है?

कॉलिन गोंसाल्वेस:
अगर स्वतंत्र न्यायिक मॉनिटरिंग होगी तो अच्छा होगा। फिलहाल ऐसा कोई आदेश नहीं है। जनता इसलिए असंतुष्ट है क्योंकि भरोसा टूटा है।

उमाकांत लखेड़ा:
आखिरी सवाल — क्या आपको इस जांच से न्याय की उम्मीद है?

कॉलिन गोंसाल्वेस:
इस समय मुझे उम्मीद कम दिखती है। शुरुआत से राजनीतिक प्रभाव नजर आता है। लेकिन हम चाहते हैं कि जांच स्वतंत्र हो। चाहे व्यक्ति कितना भी बड़ा क्यों न हो
दोषी है तो सजा मिलनी चाहिए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button