केंद्रीय बजट किसान, मजदूर, पर्यावरण विरोधी-गाँवों से पलायन को बढ़ाने वाला

1 फरवरी 2026
अखिल भारतीय किसान महासभा ने आज संसद में पेश केंद्रीय बजट को पूरी तरह किसानों – मजदूरों, छोटे व्यवसायों को आर्थिक संकट की ओर धकेलने वाला और पर्यावरण के लिए विनसकारी बताया है. किसान महासभा के अनुसार यह बजट खेती-किसानी की तबाही को रोकने और गाँवों में रोजगार को बढ़ाने के विपरीत गाँवों से पलायन को और तेज करेगा. बजट प्रवधान की दिशा देश में आपदाओं के भूगोल को बढ़ाने वाली है.
किसान महासभा ने आज प्रेस को जारी विज्ञप्ति में कहा कि बजट से पहले ब्रिटेन तथा यूरोपीय यूनियन के साथ मोदी सरकार द्वारा किए गए व्यापारिक समझौतों और अमेरिका के साथ उससे भी खतरनाक समझौते की दिशा में बढ रही मोदी सरकार पहले ही देश की खेती – किसानी पर बड़े हमले की तैयारी कर चुकी है. ऐसे में इस बार के बजट में देश के किसानों को इस सरकार से कोई उम्मीद भी नहीं बची थी.
घाटे की खेती, कर्ज के जाल में फंस कर आत्महत्या को मजबूर देश के किसानों-ग्रामीण मजदूरों की बहुसंख्या की चिंता इन बारह वर्षों में कभी भी मोदी सरकार के एजेंडे में नहीं दिखी. इसी लिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए C-2+50% के साथ एम एस पी की गारंटी का कानून, 200 दिन के काम और 700 रुपए प्रतिदिन मजदूरी की गारंटी के साथ मनरेगा कानून की वापसी, किसानों – ग्रामीण मजदूरों की सम्पूर्ण कर्ज माफ़ी जैसे सवालों से मोदी सरकार आँखें मूंदे हुई है.
हाल के कुछ वर्षों में देश ने सरकार की कारपोरेट लूट पर आधारित नीतियों के कारण बहुत बड़ी प्राकृतिक आपदाओं को झेला है. इसके बावजूद बजट प्रवधान इस विकट समस्या के समाधान के लिए भी मौन हैं. उलटे बजट प्रावधान बता रहे हैं कि उत्तराखंड, हिमांचल को अपनी विनासकारी पर्यटन नीति से आपदाओं के प्रदेश में बदलने वाली मोदी सरकार की गिद्ध दृष्टि अब जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर की पहाड़ियों पर भी टिक गई है. पर्यटन विकास के नाम पर मोदी सरकार के यह विनासकारी कदम हिमालय और हिमालयी राज्यों के पर्यावरण और परिस्थितिकीय तंत्र को विनास की दिशा में धकेल रहे हैं. यही नहीं देश के समुद्री तटों पर बढ़ता कारपोरेट नियंत्रण भी पर्यावरण और तटीय लोगों की आजीविका पर संकट को बढ़ा रहा है.
बजट में किसानों और ग्रामीण मजदूरों की हर मांग पर सरकार द्वारा बरती गई ख़ामोशी मोदी सरकार पर अमेरिकी साम्राज्यवाद के दबाव को साफ दिखा रही है. अखिल भारतीय किसान महासभा देश के किसानों से मोदी सरकार के किसान, मजदूर, पर्यावरण विरोधी बजट की निंदा करते हुए 12 फ़रवरी की राष्ट्रव्यापी हड़ताल को सफल बनाने के लिए पूरी ताकत से जुटने का आह्वान करती है.





