8 मार्च अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने आमडंडा खत्ते में एक विचार गोष्ष्ठी का आयोजन किया



8 मार्च अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने आमडंडा खत्ते में एक विचार गोष्ष्ठी का आयोजन किया I
किरन आर्या के संचालन में हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने 8 मार्च अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के इतिहास पर विस्तार से बात करते हुए महिलाओं के लैंगिक समानता, काम के अधिकार तथा आज के दौर में महिलाओं के उत्पीड़न के लिए ज़िम्मेदार पुरुष प्रधान मानसिकता से ग्रस्त व्यवस्था को दोषी करार दिया। कार्यक्रम की शुरुआत युवा साँस्कृतिक कला मंच के बच्चों द्वारा गाए गए गीत से हुई।
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के प्रधान महासचिव प्रभात ध्यानी ने कहा कि महिलाओं के साथ पैदा होने से लेकर घर व बाहर दोहरा शोषण व उत्पीड़न हर जगह पर होता है। जिसके लिए आज महिलाओं को एक सामाजिक आंदोलन के लिए खुद को खड़ा करना होगा तभी महिलाएं अपने ऊपर हो रहे अत्याचार व शोषण से मुक्त हो सकती हैं।
साइंस फार सोसाइटी (यूनाइटेड)के प्रवक्ता गिरीश आर्य ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर आमडंडा खक्ता मेंआयोजित अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कहा कि आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस क्यों मनाया जाता है और कब से मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि 1910 में कोपेनहेगन में आयोजित राष्ट्रीय महिला सम्मेलन मे समाजवादी नेता क्लारा जेटकिंग वर्किंग महिलाओं कार्य के घंटे 12 से घटकर 8 किया जाए और पुरुषों के बराबर ही महिलाओं को वेतन दिया जाए, कार्य स्थल पर महिलाओं को सुरक्षा प्रदान की जाए और महिलाओं को मताधिकार का अधिकार दिया जाए से संबंधित प्रस्ताव रखें इन प्रस्तावों को 1911 की राष्ट्रीय महिला सम्मेलन में पारित किया गया तभी से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है । पार्टी कार्यकर्ता आसिफ ने कहा कि महिलाएं अपने दोहरे शोषण के लिए जिम्मेदार इस व्यवस्था के खिलाफ़ एकजुट हो। लालमणी ने कहा कि 1908-1909 के दौरान महिलाओं ने काम के घंटे कम करने , वोट देने व लैंगिक समानता के लिए एकजुट होकर मजदूर वर्ग के साथ मिलकर आंदोलन किया था, तब जाकर उन्हें आज वे सभी अधिकार मिले। जिसमें वे अपनी आवाज को बुलंद कर रहे हैं।आज जब समाज में उत्पीड़न व ज़ुल्म फिर महिलाओं के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुके हैं, वे घर के अंदर या बाहर कहीं भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रही है, तब ज़रूरत बनती है कि वे फिर से एकजुट हों।
गोष्ठी में मेघा, गिरीश आर्या, सरस्वती देवी, नंदी देवी, निर्मला देवी, नवीन चन्द्र, दिनेश चन्द्र, चिंता राम, कौशल्या, मोहित कुमार ने गोष्ठी को संबोधित किया। गोष्ठी में ललिता देवी, नीता देवी, माया देवी, भावना, रिंकी ,सरिता रावत ,कमला देवी, शांति देवी, सीता देवी, कांति देवी, जशोदा , बचुली देवी, देवकी देवी, माया, रितु देवी, कविता ,गोविंद, इन्दिरा देवी, खष्टि देवी, हीरा देवी, पुष्पा देवी, चम्पा देवी सहित बड़ी संख्या में लोगों ने भागीदारी की।





